झूठी सफलता के दायरे से बाहर निकलें | Take Decision & Start Up

सफलता की इच्छा (Success Desire) रखने वाले व्यक्ति के पास एक लक्ष्य (Target) होता है और वह उसे प्राप्त करने के लिए अपनी मंजिल (Goal) की ओर चल देता है। रास्ते में वह कठिनाइयों का सामना बड़ी हिम्मत (Great courage) और आत्मविश्वास (Self Confidence) के साथ करता है और आगे बढ़ता जाता है।

लेकिन अधिकतर ऐसा होता है कि सफलता के रास्ते (Way of success) में यदि कोई छोटी सफलता (Little Success) मिल जाती है तो व्यक्ति उसी को अपनी असली खुशी (True Happiness) मानने लगता है और वहीँ पर रुककर उस छोटी सफलता से मिलने वाली छोटी ख़ुशी (Little pleasure) का आनंद लेने लगता है।

अब उसका अपने Main Target की तरफ बढ़ना रुक जाता है और वह उस छोटी ख़ुशी में ही सिमट कर रह जाता है।

ऐसा नहीं है कि उसे अपने लक्ष्य का ध्यान नहीं होता लेकिन उस थोड़ी सी ख़ुशी को कुछ और समय (Time) तक पाने की इच्छा (Desire) उसको आगे नहीं बढ़ने देती।

और अंत में Result यह होता है कि अब उस छोटी सी सफलता से मिलने वाले सुख (Happiness) का वह आदी हो जाता है और अब इस छोटे से सुख (Tiny happiness) की आदत (Habit) उसे चाहकर भी अपनी मंजिल की ओर एक कदम (A step to achieve goals) भी नहीं बढ़ाने देती।

अब वह व्यक्ति उस छोटी सी ख़ुशी के छोटे से दायरे (Short limit) में ही सिमट कर रहने लगता है। ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है।

लेकिन इस छोटी सी ख़ुशी में सिमट कर (Confined) रहने के बाद भी वह व्यक्ति जीवन भर (Whole life) असली ख़ुशी को प्राप्त नहीं कर पाता है क्योकि उसके मन (Mind) के किसी कोने में उसका वह Main Target हमेशा खलबली (Turmoil) मचाता रहता है और उसे कभी भी सच्ची ख़ुशी के साथ जीने नहीं देता।

और दूसरी ओर बहुत चाहने के बाद भी वह व्यक्ति इतना Time नहीं निकाल पाता कि अपनी सच्ची सफलता की ओर एक कदम (First step to True Success) भी आगे बढ़ पाये।

अब ऐसी ही असमंजस की स्थिति (Confusion) में वह व्यक्ति अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देता है। अंत में वह एक असफल व्यक्ति (Failure) के रूप में या एक साधारण व्यक्ति (Simple Person) के रूप में ही इस दुनिया (World) से चला जाता है।

दोस्तों ! बहुत से ऐसे लोग हैं जो ऐसी Situation का सामना कर रहे हैं। यह सबसे दुखद है कि नकली ख़ुशी (Fake Happiness) में सिमट कर रह जाना और चाह कर भी असली ख़ुशी (True Happiness) की ओर न बढ़ पाना।

अब प्रश्न यह उठता है कि कमी कहाँ रह गई?

क्या कारण था जिसको उस व्यक्ति को अंत में मिली असफलता का जिम्मेदार (Responsible for Failure) माना जा सकता है?

इन दोनों प्रश्नों का एक ही Answer है और वह है—उस व्यक्ति का झूठी सफलता (False success)को गले लगाकर एक छोटे से दायरे में ही सिमट कर रह जाना !!!

एक प्रश्न (Question) यह भी है कि क्या वह अपने इस दायरे से बाहर निकल सकता था?

बहुत चाहने के बाद भी वह अपना छोटा सा दायरा नहीं छोड़ पाया, क्या वह कुछ ऐसा कर सकता था जिससे वह अपने चारों ओर बने इस दायरे को तोड़ पाता? और अपनी असली सफलता को प्राप्त कर पाता?

इसका Answer है— हाँ !!! ऐसा संभव था। (Yes !!! It was possible.)

कुछ ऐसे तरीके हैं जिससे वह अपने मनपसंद मंजिल (Favorite Target) को पा सकता था।

लेकिन कैसे???

इसका उत्तर है कि— अब निर्णय लिया जाये !!! (Decision taken now !!!)

यानि अब असली सफलता के बारे में केवल सोचा ही न जाये बल्कि अब आगे बढ़ने का महान निर्णय (Great Decision) लिया जाये। सच है, अब निर्णय (Decision) ले ही लिया जाये वरना देर हो जाएगी।

निर्णय लेने (Decision taking) का मतलब होगा कि आप अपने छोटे दायरे में से निकलने को तैयार (Ready) हो गए हैं। ध्यान रहे निर्णय लेना यहाँ सबसे Important Part है।

कुछ समय अपने लिए निकाल कर अपनी मंजिल के बारे (Think about goal) में यह सोचा जाये कि यदि वह आपको मिल जाये तो आपको कैसा महसूस होगा? और उस ख़ुशी को Feel किया जाये।

इससे आपकी सफलता के लिए इच्छा (Success Desire) बढ़ेगी।

अब अपनी इच्छाशक्ति (Will power) को बढ़ाकर अपने आत्मविश्वास (Self-confidence) के साथ सफलता की ओर एक बार फिर से कदम बढ़ा दिए जाएं।

सफलता की ओर कदम कैसे बढ़ाया जाये (How to expand step toward success) और क्या तैयारियां की जाएं इसके लिए जरूर पढ़िए– सफलता के लिए पहला कदम

अब जब कदम अपनी मनचाही मंजिल (Favorite Goal) की ओर बढ़ा दें तो पीछे, दायें, वायें, ऊपर नीचे इधर-उधर कहीं के बारे में न सोचा जाये। अब तो सामने मंजिल हो और आपकी नजर केवल अपनी मंजिल पर हो।

तब आपको कोई भी उस Target तक पहुचने से नहीं रोक सकता। सच में, कोई भी नहीं।

क्योकि इस बारे में गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) ने ठीक ही कहा है–

“जिसने अपने को वश में कर लिया और जीत का निर्णय ले लिया, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते।”

अतः निर्णय (Decision) तो लीजिये दोस्त, फिर असली और मनपसंद सफलता के मीठे स्वाद को चखिए। इसी का नाम जिंदगी (Life) है जहाँ केवल सोचने से नहीं बल्कि कुछ करने के निर्णय लेने (Take Some decisions) से बहुत कुछ होता है।

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